नाइट वाली शायरी





ये शाम कुछ ऐसी है, तन्हाई का इंतज़ार है, ना जाने कौन सा ख़्वाब जगा रहा है निगाहों में, रात इतनी गहरी है, जैसे कोई दरिया हो, और उसकी लहरों में मैं खुद को खो रहा हूँ।

सितारों की रौशनी में, चाँद के साथ बैठ कर, ज़िन्दगी की हक़ीक़त से, दिल को थोड़ा सा आराम है, अब न जाने कैसे गुजरेगी ये रात का सफ़र, पर मेरी नज़रों में, ख़्वाबों की दुनिया है।

ना कोई आवाज़ है, ना कोई शोर है, ये शाम इतनी ख़ामोश है, जैसे आसमान भी थम है, और उसमें जगमगाहट के बजाय, शांति का एहसास है

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